अकादमी का परिचय एवं इतिहास

इस अकादमी को दांगी राजा ऊदलशाह द्वारा सन् 1660 में निर्मित किले में स्थापित किया गया है। अकादमी के दक्षिण पूर्व में लाखा बंजारा झील है एवं उसके ऊपर विंध्य की पहाड़ियाँ हैं, जो अकादमी को मनमोहक दृश्य प्रदान करती है। झील के किनारे होने के कारण सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय पर इस अकादमी की सुंदरता और भी निखर जाती है, इसलिये यह अकादमी मध्यप्रदेश के सर्वोच्च स्थानों में से एक है।

मध्यप्रदेश के सागर जिले में स्थित इस अकादमी की नींव सन् 1906 में ब्रिटिश काल के दौरान रखी गई, उस समय इस अकादमी के मुखिया जी.डब्ल्यू गेयर थे। कालान्तर में यह संस्था सन् 1906 में पुलिस टेªनिंग स्कूल (पी0टी0एस0) के नाम से जानी जाती थी, इसके प्रथम प्रधानाचार्य अंग्रेज प्रो0 जी0डब्ल्यू0 गेयर थे तथा इनके द्वारा प्रयोग में लाई गई कुर्सी अकादमी के म्यूजियम में रखी गई है। तत्पश्चात् यह संस्था का पी.टी.एस. से उन्नयन कर सन् 1936 में पुलिस ट्रेनिंग काॅलेज किया गया। इस अकादमी को सन् 1952 में तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा कलर प्रदान किया गया । सन् 1986 में संस्था को पुलिस ट्रेनिंग एकेडमी का दर्जा प्रदान किया गया।

सागर कस्बे के बारे में यह माना जाता है कि यह कस्बा अविभाजित भारत के मध्य में स्थित है, सागर कस्बे के बारे में यह माना जाता है कि, यदि अविभाजित भारत के नक्शे को देखा जाए तो सागर, उस नक्शे के बीचों बीच स्थित है, इसलिये यह संस्थान सागर में बनाया गया।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सन् 1857 की क्रांति के दौरान क्रांतिकारियों द्वारा इस किले को घेर लिया गया था तब किले में अंग्रेजों को आठ महिने तक बन्धक बना लिया गया था।